GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyप्यार से...प्यार से हमको कभी बुलाया भी करो,नफरत के धधकते शोले बुझाया करो!बेरहम ज़िन्दगी से आँखें मिलाया करो,मंजिल पर आँखें गढ़ायां भी करो!धड़कते दिल का स्पंदन छुपाया न करो,बुझी सी राख में चिंगारी सुलगाया न करो!वक़्त...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें