GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. भाग ३१भाग ३१विभा, वैदेही और वज्र गुलमोहर तले यश का इंतज़ार कर रहें थे। सर्द हवाओं के बीच सूरज के पदार्पण से सभी उल्हासित थे। सूरज की सुनहरी किरणे चेहरे पर नूर बिखेर रही थी। तभी यश को देख विभा बोल पड़ी, " शैता...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें