नज़रिया
शब्द को शब्द से हराकर तो देखो अश्क को हाथ से हटाकर तो देखो लोगो के गम का ठिकाना नहीं यहां पर कभी गम को खुशी से मिटाकर तो देखो आनंद की खोज में भटकते यहां वहां कभी मन को एकांत में लगाकर तो देखो जीवन बन...
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