GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी....भाग १७भाग १७वैदेही, वज्र और यश को 'न्यू नार्मल' की तरफ लौटने में एक सप्ताह का समय लग गया था! वज्र को कोई असुविधा न हो इसलिए एक बड़ी सी खिड़की के पास उसके बैठने की व्यवस्था की गई थी.. उसे अलग से आरामदायक...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें