GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyआधि-व्याधि का चक्रव्यूह....1.अंतरिक्ष की टोह लूँ मैं, चन्द्रमा पर ढूँढू ठौर,बाज़ सी उड़ान भरुं मैं, हौसला हो सिरमौर!2.लक्ष्य मत्स्य-नेत्र सन्धान, एकाग्रता का भान,काया-माया जंजाल में भटके न कहीं ध्यान!3.आधि-व्याधि के चक्रव्यूह में...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें