ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. भाग ३८
भाग ३८जानकी जी सर्द रात में शाल ओढ़ आराम कुर्सी पर सोने की कोशिश कर रही थी लेकिन अड़ियल बच्चे सी यादें गोद में आ कर बैठ गई थी न तो वह उन्हें दुत्कार कर अलग कर सकती थी न दुलार कर सीने से लगा सकती थी! शाल...
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