हंसगति छंद-बचपन!
नमन माँ शारदे 🙏🙏हंसगति छन्द 11+94 4 (21), 3242+2 समतुकान्त।सपने सारे आज, हुएं हैं सच्चे।चलो आज फिर बाग, बने हम बच्चे।।मन में है उल्हास, बदन में ऊर्जा।निर्मल अतिशय भाव, नहीं सिर कर्जा।।बचपन...
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