बेदर्दी!
बरसों बीते ज़िन्दगी से रूबरू हुएं..तन्हाईयों में खुद से गुफ़्तगु में शामिल हुएं!अभी न मुझ से मेरा हाल पूछो ए बेवफा!संभल न पाएँ जो नयन-कटार से घायल हुएं!रिश्तों की देहरी पर दीप जलते रहें, चाँद-तारों...
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