GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyबेदर्दी!बरसों बीते ज़िन्दगी से रूबरू हुएं..तन्हाईयों में खुद से गुफ़्तगु में शामिल हुएं!अभी न मुझ से मेरा हाल पूछो ए बेवफा!संभल न पाएँ जो नयन-कटार से घायल हुएं!रिश्तों की देहरी पर दीप जलते रहें, चाँद-तारों...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें