GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी...भाग ९१गुलमोहर की छाँव में सभी चबूतरे पर बैठे हुएं थे। गर्म हवाएं बह रही थी। सुबह के साढ़े दस बजे भी उनकी तपन महसूस हो रही था। गुलमोहर भी खामोश खड़ा था। न फूलों की बरसात न पत्तों की हलचल! पंछी भी डाल से ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें