ये प्यार ही तो ज़िन्दगी...
भाग ९१गुलमोहर की छाँव में सभी चबूतरे पर बैठे हुएं थे। गर्म हवाएं बह रही थी। सुबह के साढ़े दस बजे भी उनकी तपन महसूस हो रही था। गुलमोहर भी खामोश खड़ा था। न फूलों की बरसात न पत्तों की हलचल! पंछी भी डाल से ...
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