GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify फिर वही सुबह फिर वही शाम फिर वही सुबह और फिर वही शाम क्या है जीवन ! क्या है मृत्यु ! क्या है इसका अंतिम मुकाम ! हंसते चेहरे रोते चेहरे कुछ गंभीर और कुछ घनेरे कुछ उलझ गये कुछ सुलझ गये कुछ अधर में ही झुलस गये करते-करते ह...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Kapil TiwariThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें