मन की कसक!
परिंदे चहचहॉं रहे थे, गुलाब, चमेली, पारिजात सूरज की रश्मियों को देख खिलखिला रहे थे, बादलों की हवा के झोंको के साथ चहलकदमी जारी थी! सूरज धीरे-धीरे पश्चिम की ऒर बढ़ रहा था और सुबह की चाय के साथ दो बिस्कु...
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