सपनों की उड़ान
माँ की कोख से,बंद मुट्ठियों मेंअपना नसीब ले आई।क्यूँ न स्वीकारुँ इसे, स्वयं द्वाराअर्जित पूँजी जो पाई।सुख-दुःख मान सम्मान के पीछे, छिपा है कर्म मतवाला।इसे न किसी ने दान में ही पाया, न ईश्वर ...
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