GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyसपनों की उड़ानमाँ की कोख से,बंद मुट्ठियों मेंअपना नसीब ले आई।क्यूँ न स्वीकारुँ इसे, स्वयं द्वाराअर्जित पूँजी जो पाई।सुख-दुःख मान सम्मान के पीछे, छिपा है कर्म मतवाला।इसे न किसी ने दान में ही पाया, न ईश्वर ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Sheela SanchetiThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें