GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyनारी देवी का रूप है ममता की शीतल छाया , करुणा की मीठी धूप है इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है खुशियों को वो सदा बांटती खुद गम के आंसू पीती नारी वह जो खुद की नहीं और...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Vikram KumarThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें