GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyज़िन्दगी!ज़िन्दगी!ज़िन्दगी! तेरी हर अदा पें प्यार आया,रोते-रोते मुस्कुराने का हुनर सीखलाया।गमों की बारिश में तर-बतर मन भाया,गंगा नहाने का पुण्य मेरे हिस्से आया।।किसे फुरसत है आँसू बहाने की?गैरों के खातिर वक़्त बर...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें