GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify"हार""हार""हार" हां मैं हार गया हु।।।। हां मैं हार गया हूँ शरीर की हर उस जकड़न से जिसने मुझे जकड रखा हैं।।। हां हां मैं हार ही गया हूँ।।।। क्या क्या रखा हैं इस ज़माने मै।।।।।। गम के सिव।।।।। मोहब्बत कहा हैं ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा Yatharth PuriThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें