घनाक्षरी
दुम क्यों दबाते हो।शक्ति को पहचानिए,खूब कौशल पाइए,दुम क्यों यूँ दबाते हो,साहस घूंट पीजिए।।पीछे पीछे आये कोई, शरारती आतताई,डटकर हो धुलाई,मजा आप लीजिए।।तंग करे राह चले,देख आप हो अकेले,जमकर हो पिटाई...
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