GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify होश.. खिले-खिले गुलाबी अधरों को चुम सोचा इश्क़ करूँ, चंपा-चमेली-महुआ मेहंदी रची हथेलियों पे धरूँ! होठों से जो पिलाई हमसफ़र, नशा अभी बाकी है.. जाम छलक गया मगर प्यार का खुमार बाकी है ....LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें