माँ! स्वीकार कर लो..
माँ! क्यों नहीं छोड़ आई घने जंगल में... अपाहिज बेटी को हिंसक पशुओं के बीच में? क्यों लड़ती रही मंथराओं,शकुनियों,स्वजनों से? जिन्दा रखने अंश को पत्थर दिलों की बस्ती में? माँ! क...
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