GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify गाँव!शीर्षक: गांव! बूढे बापू की बुढ़ी चमड़ी सी, सूखी धरती फटी- फटी! तरस रही छुपाने बरसों से, दिल की दरारें कटी-कटी! दूरियां हैसियत में जुदा-जुदा हैं, पर झोपड़ियां हैं सटी-...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें