गाँव!
शीर्षक: गांव! बूढे बापू की बुढ़ी चमड़ी सी, सूखी धरती फटी- फटी! तरस रही छुपाने बरसों से, दिल की दरारें कटी-कटी! दूरियां हैसियत में जुदा-जुदा हैं, पर झोपड़ियां हैं सटी-...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े