प्रकृति
शीर्षक : प्रकृति: भोर का पल्लू थामे, जिद पे अड़ा चंद्रमा! कुहुँ-कुहुँ सुन मुस्कुराई, सूर्योदय की लालिमा! छंटे नैराश्य के बादल, छा गई अरुणिमा! प्रकृति खूब खिलखिलाई, भागी हठी ...
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