GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyभ्रम!हे मूर्ख मानव! क्यों पाले है भ्रम?सदियों से जारी यह क्रम!नश्वर के पीछे भाग-दौड़,शाश्वत से खड़ा मुँह मोड़!जगतजेता सिकंदर,गया दुनिया से खाली हाथ!तू क्या उखाड़ ले जायेगा,कल्पवृक्ष, रिश्ते-नाते साथ?हे म...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें