GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyरिश्ते!रिश्ते, जो लब्जो में बयाँ होते हैं ,दिल के आसपास कहीं होते हैं,जरासी आँच से पिघलते हैं,बर्फसे नीर बन फिसलते हैं,कोहरे से धरा पें छाते हैं,नई-नवेली किरणों को निगलते हैं,दिल में शूल से चुभते हैं|रिश्ते ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें