GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyदेवकीनंदनदेवकीनंदन! कंस की चीत्कार से कांपे, मथुरा कारागार के गलियारें! देवकी-वासुदेव के अंत:स में, छाए कृष्णपक्ष के अंधियारे! कैसी विडंबना किस्मत की, सोचे देवकी मय्या मन में! सात-सात स...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें