देवकीनंदन
देवकीनंदन! कंस की चीत्कार से कांपे, मथुरा कारागार के गलियारें! देवकी-वासुदेव के अंत:स में, छाए कृष्णपक्ष के अंधियारे! कैसी विडंबना किस्मत की, सोचे देवकी मय्या मन में! सात-सात स...
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