GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify दोहे...कठिन डगर हैं प्रेम की, काँटों की हैं राह| मधुर मिलन की चाह हैं, भूल जगत का दाह|| कठिन सदा हैं जीतना, चोटी पर स्थिर वास, हार-जीत में झूलते, अविचल रखना आस! मोर-मोरनी बाग में, नाचे जग को भूल | ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें