GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyयुद्ध बनाम बर्बादी...खून खराबा संग सामुहिक ...विधा :काव्य बड़े आका बैठ बंकर में, युद्ध नीतियां गड़ते है ।अहंकार को पोषित करते, और परस्पर भिड़ते है ।।खून-खराबा संग सामुहिक, देखो जी कितना होत...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा अशोक दोषीThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें