यें कहाँ आ गएँ हम?
विकास का ढोल पिटते-पिटते ...ये कहाँ आ गए हैं हम? आये दिन अमानवीयता,अमानुषता,जुल्म के नए-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं ... नैतिकता, सच्चाई, परोपकार जैसे शब्दों को जीवन की आपा-धापी में अपने ...
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