सुरक्षा का बंधन
 दिपांशी की नजर बार- बार दरवाजे और घड़ी की आवाज पर बारी बारी उठ रही थी। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जो उसने आने में इतनी देर लगा दी हो। फोन करके पूछूँ यह ख्याल भी आया लेकिन दूसरे ही क्षण वह गाड़ी चला र...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े