ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग २९
भाग २९विभा घड़ी के काँटों को देख वक़्त की रफ़्तार को पकड़ने की कोशिश कर रही थी..वक़्त का भी क्या रुबाब हैं... एक बार मूँछ को तांव दे आगे बढ़ गया कि फिर कभी पीछे मूड कर नहीं देखता भले ही पीछे विश्वसुंदरी क्य...
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