GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodify ईश्वरीय शक्ति.. अस्ताचल का सूरज दूर सफ़र पर निकल चूका था! आसमान में फैली लालिमा आँखों से हौले-हौले ओझल हो रही थी और रात श्यामल चंद्रकला ओढ़ दबे पाँव आ रही थी! कॉलेज का वार्षिक उत्सव ख़त्म हो चूका था और सभी साथी घर...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें