थकी अँखियाँ
दरवाजे की ओट सें थकी अंखियां रही पथ निहार,कब लौटेगा मेरा साहिबा, मेरे हिवड़े का हार?सीमा पर तैनात मेरा जांबाज रणबांकुरा  भरतार,पहाड़ी पार छुपे आतंकियों पर कब करेगा प्रहार?नयनों कें झील का सूखा-सूखा...
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