GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyथकी अँखियाँ दरवाजे की ओट सें थकी अंखियां रही पथ निहार,कब लौटेगा मेरा साहिबा, मेरे हिवड़े का हार?सीमा पर तैनात मेरा जांबाज रणबांकुरा भरतार,पहाड़ी पार छुपे आतंकियों पर कब करेगा प्रहार?नयनों कें झील का सूखा-सूखा...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें