रक्षाबंधन!
श्मशान की नीरवता को भंग करती आग की लपटें धूं धूं करती आसमान की ओर बढ़ रही थी! मन उद्विग्न था! सब से कम उम्र की बहन कैंसर से जंग हार कर समाधि मरण का वरण कर चूकी थी और हम सब जीवन की नश्वरता को महसूस कर ...
पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े