बच्चें....
फुरसत के पलो में कबीर जी के दोहे पढ़ रही थी.. "गुरु गोविन्द दोहुँ खड़े, काके लागु पाय ,बलिहारी गुरु आपनो, गोविन्द दियो बताय"मैं आत्मनिरीक्षण क़र रही थी। भाग्यवान थे हम जो हमें ऐसे गुरु मिलें जिन्ह...
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