GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyबच्चें....फुरसत के पलो में कबीर जी के दोहे पढ़ रही थी.. "गुरु गोविन्द दोहुँ खड़े, काके लागु पाय ,बलिहारी गुरु आपनो, गोविन्द दियो बताय"मैं आत्मनिरीक्षण क़र रही थी। भाग्यवान थे हम जो हमें ऐसे गुरु मिलें जिन्ह...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें