GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyदीप अपनी माटी के...दीप अपनी माटी केदीप माला,पुष्पहार,सजाये बंदनवार,रंगोली में रंग भर,आँगन सजाइये।।दीप अपनी माटी के,प्रेम पगी संस्कृति के,घर-द्वार उजियारा,उत्सव मनाइये।।होवे आदर-सत्कार,खिले आनंद बहार,फल, मेवा, मिठाई,&nbs...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा चंचल जैनThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें