तितली!
चित्र आधारित दोहा सृजन!इंद्रधनुषि हैं राजसी, तितली के सब रंग।फूल-फूल पर बैठती, गुन-गुन गाती संग।।कोमल सुन्दर पंख हैं, तितली आतुर आज।चुन पराग कण ओढ़ती, सपनों का मृदु साज।।डरता छूने को उसे, मेरा कोमल हाथ...
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