ढलता सूरज....
दिलों के दर्द को न बढ़ाओ... मान जाओ न... तन्हाईयों में हमें न तड़पाओं... लौट आओ न... कम्बख्त जवानी गुजर गई चंद रुपएँ कमाने में, बची-खुची, नौनिहालों को कंधों पर घुमाने में! दिल की कर ...
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