बलात्कार बलात्कार ही है...
बलात्कार बलात्कार ही है, राजधानी में हो या गली, कुचे में, बंद कमरों में ... अत्याचार की क्या अलग परिभाषा होती है? दर्द की इन्तहा वही शुरू होती है ..... इंसानियत जहाँ दम तोड़ती है ......
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