ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ४४
भाग ४४'मुम्बई दर्शन' का वह अंतिम पड़ाव था! सभी 'मरीन ड्राइव' पर पहुँच चुके थे... सूरज झटपट क्षितिज के उस पार जा कर छुपने को मानों उतावला हो चूका था क्योंकि रात उसे केसर घुला मोतीचूर का लड्डू समझ मुँह म...
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