GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyदो नाव पर रहे हरवंश हृदयजरूरत पड़ी तो धूप नहीं तो छांव में रहे बेगैरत हैं वो लोग जो दो नाव में रहे हमने तो सौंप दी दिल की सल्तनत उन्हें अफसोस कि वो फिर भी चुनाव में रहे संबंधों की बुनियाद स्वार्थ पर रखकर शहरों...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा हरवंश हृदयThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें