खुदा की मेहर...
पलकों में ठहरी मोतियों की लड़ियाँ  फिसलने को बेताब,प्राची की तनी भृकुटी जब छेड़ा-छेड़ी करे  आफ़ताब!पवन संग बह चला परागकणों का  सैलाब!निशा खेले छुपा-छुपी, कहकहें लगाए माहताब!पंखुडियों न...
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