GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyखुदा की मेहर...पलकों में ठहरी मोतियों की लड़ियाँ फिसलने को बेताब,प्राची की तनी भृकुटी जब छेड़ा-छेड़ी करे आफ़ताब!पवन संग बह चला परागकणों का सैलाब!निशा खेले छुपा-छुपी, कहकहें लगाए माहताब!पंखुडियों न...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें