GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyये प्यार ही तो ज़िन्दगी..भाग ६८भाग ६८प्रताप सिंह शर्मा जी का यश एकलौता बेटा था। उनकी जो भी कुछ उम्मीदें थी यश से ही जुड़ी हुई थी। लक्ष्मी जी की कृपा उन पर अनवरत बरस रही थी। यश के अपाहिज होने के बाद भी वह परम पिता परमात्मा के ऋणी थे ...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें