रिश्ते अजीबोगरीब....
घने अंधेरों में छू-मंतर हुए जो रिश्ते अजीबोगरीब  से,दिल ही तो है, जानता दुनियादारी बहुत करीब से!कृष्ण पक्ष का चाँद शर्मिंदा नहीं अपनी गुस्ताखियों पे...फ़ितरत हैं साये की कालिख पोतने की उजालों पे!क...
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