GET IT ONGoogle PlayDownload ONApp StoreSign Up!Loginmodifyबाबूजी!कितना फब रहा था बाबूजी के माथे पे लहरियां साफा! गेहुआं रंग, बड़े-बड़े लेंस वाली ऐनक, सिल्क की शेरवानी और झुर्रियों से पटे भाल पर कुंकुम तिलक, मानों किसी राजमहल में टंगी तस्वीर में उभरा राजसी चेहरा!जैस...LabelDirected by पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करेंपढ़े द्वारा कुसुम सुराणाThe Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें