3 7 5685 3 5685 रिश्तें नफरत की यह आँधी, लील गई सब रिश्तों को।अपनापन स्नेहिल बिसराया, बांटा नेह परायों को।नहीं आपसी भाईचारा, प्रेमिल सी निर्मल धारा~मानव मन धर्म भ्रष्ट स्वार्थी, भूलाया अपनी संस्कृति को।चंचल जैन Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared03 Apr 2025 Start 03 Apr 2025 End 03 Apr 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Pranal Jain 03-May-2025 Comment Like बहुत ही दिल को छू लेने वाली Pranal Jain 13-May-2025 Comment Like अत्युत्तम सृजन Chavi Jain Dhabaria 16-Aug-2025 Comment Like बधाई हो! Intranetuser Demo 02-Nov-2025 Comment Like सुन्दर छवि, सुन्दर प्रस्तुति Sachin Jain 17-Feb-2026 Comment Like वाह! ❤️❤️ Tanu Jain 18-Mar-2026 Comment Like बिल्कुल दिल को छू लेने वाली रचना Creativeinfo Demo 24-Apr-2026 Comment Like क्या खूब लगती है, बड़ी सुन्दर दिखती है ❤️❤️❤️❤️ रिश्तें © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें