भाव झरना भाव झरना 

रंगों का मेला मनभावन।
प्रीत, स्नेह हो निर्मल, पावन।।
मेल-जोल साथी नित रखना।
जीवन धर्म भाव हो झरना।।

स्वरचित मौलिक रचना 
चंचल जैन
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