रोला छंद
रोला छंद
विषय : मौलिक 

सपने सुन्दर देख, मनुज तू अपने दम पर।
लिख तू अपना लेख, कोशिशों के ही बल पर।।
चलना है मनु नित्य, सफ़र रखना तू जारी।
लक्ष्य भेद का ध्यास, पार्थ का पड़ता भारी।।

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।
इस पर लोग क्या कह रहे हैं