2 1 6287 2 6287 रोज.. डार्लिंग! रोज-रोज रोजी को रोज मंगता!दिल-विल छोड़ो, लाल-लाल गुलाब मंगता।यारा! दिलदारा! तेरी बाहों का हार मंगता,होठों की छुअन, नशीला मय का जाम मंगता!स्वरचित तथा मौलिक Label Directed by द्वारा कुसुम सुराणा Shared10 Feb 2025 Start 10 Feb 2025 End 10 Feb 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Neetu Jain 25-Jun-2025 Comment Like मनमोहक शब्दों से बयाँ करते सुन्दर ! बधाई रोज.. © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें