शीर्षक : ये कहाँ आ गए हम?
विकास का ढोल पिटते-पिटते ...ये कहाँ आ गए हैं हम? आये दिन अमानवीयता,अमानुषता, नृश्रृंशता , जुल्म के नए-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं ... नैतिकता, सच्चाई, परोपकार जैसे शब्दों को जीवन की आपाधापी में अपने शब्दकोष से हम कब का मिटा चूके हैं ..समाज के उत्थान के मापदंडो को हम मीलो दूर छोड़ आए हैं ....समाज भौचक्का हैं...देश हतप्रभ है...सिस्टम, प्रशासन खुद को असहाय महसूस कर रहा हैं ....भ्रष्टाचार ने अपनी जड़े इतनी गहराई तक फैला दी है कि वह मानो वटवृक्ष से विशाल इस देश की शाख-शाख, पत्ते-पत्ते, फल-फूल में समां गया हैं ..देश का कोई क्षेत्र ऐसा नहीं है जिसका भ्रष्टाचार अभिन्न अंग नहीं है! एक लाइलाज बीमारी की तरह यह शरीर के हर एक पूर्जे में समाहित हो गया है और एड्स की बीमारी की तरह इसने हमारी नैतिकता, सामाजिक सरोकारों, जिम्मेदारियों के प्रति प्रतिबद्धता को कमजोर कर दिया हैं....
हर शख्स जिम्मेदार हैं lइस अद्धपतन के लिए ...समाज का हर हिस्सा भागीदार है इसमें ....क्यों एक सज्जन, इमानदार, कर्तव्यनिष्ट इन्सान डर महसूस करता है और अपराधी बेखौफ होकर घुमता है राजधानी की सड़को पर! क्यों नेता चंद सालो में करोडपति बन जाता है और आम आदमी कंगाल? क्यों अन्नदाता भूखा, प्यासा रहता है और चूहे चट कर जाते हैं लाखो टन अनाज? क्यों जन्म से पहले ही कन्या भ्रूण की हत्या कर दी जाती है और पुत्र जन्म पर बधाइयों का ताँता लग जाता है? क्यों किसी महिला बैड़ को अश्लील ताने और धमकियों की वजह से अपने दिल के पसंद का काम छोड़कर घर पर बैठने पर मजबूर होना पड़ता है?आज भी क्यों एक महिला, बच्ची घर के अन्दर-बाहर गिद्ध का शिकार बनती है? क्यों अपराधी दरिंदगी की सारी हदे पार कर जाता है? क्यों समाज लड़की को ही लक्ष्मण रेखा के भीतर रहने की सलाह देता हैं? क्यों एक महिला शीर्ष पद पर आसीन होने के बावजूद भी संवेदनहीनता और अकर्मन्यता का बोलबोला नजर आता है?
आखिर कहाँ है इसका अंतिम छोर? किस मोड़ पर आकर हम ठहरेंगे? कब तक हम निष्प्राण खड़े यह तमाशा निहारते रहेंगे? कब हम जागेंगे औरj प्रतिरोध करेंगे?कब तक हम समाज में पैसे को महत्व देते रहेंगे? क्या साध्य और लक्ष्य की सुचिता हमारे लिए कोई मायने नहीं रखती ? कब तक हम ख़ामोशी की चादर ओढ़े सोते रहेंगे? कब तक विकास की अंधी दौड़ में हम अपना सब कुछ लुटाते रहेंगे? आखिर यह कहाँ पहुँच गए हैं हम? आगे सिर्फ और सिर्फ अँधेरा ही नजर आता है मानवता के लिए!!