निश्चल छन्द!
सादर समीक्षार्थ 
निश्चल छंद: 

सच अडा-खड़ा है कोने में, डर कर आज।
झूठा बड़ा-चढ़ा कर बोले, बिगाड़ काज।।
सब गुलाम, कर सलाम खोले, कभी न राज।
बाहुबली पर गिरती कब है, न्यायिक गाज।

स्वरचित मौलिक रचना 
कुसुम अशोक सुराणा, 
मुंबई, महाराष्ट्र
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