अमेरिका की पंचायती!

दिनांक:२०-६-२०२५


विधा :काव्य 

शीर्षक: अमेरिका की पंचायती


बड़े  आका बैठ बंकर में, 

 केवल हुक्म चलाते हैं।

  मरते हैं वो मरने वाले ,

  ‌ इगो पोषते जाते है।।


 छुप जाते है खुद  वो तो,

  मुल्क डला बर्बादी में ।

जलाते अपने ही देश को,

  विकृत वादी प्रमादी में ।।


हालत खराब है जनता की,

    उन सारे सब देशों में।

जो जो यौद्धिक दंश झेलते,

   झांको उन अवशेषों में।।


   


  सकल विश्व है चक्रव्यूह में 

      ये युद्ध दुष्प्रभावी है

   आम आदमी यही सोचता 

   पता नहीं क्या  भावी है।।


जिद्दी  सभी अड़ियल देश है 

   सीखें कुछ वे मोदी से

 कैसी उनकी युद्ध निती है

   बनाते दबाव विरोधी पे।


  सबक सिखाए दुश्मन को‌,

  अधिक नहीं नुकसानी थी।

  लाल आंखें बता छोड़ दिया, 

      दूर की परेशानी थी।


 अमेरिका पंचायत प्रणाली, 

    खुली सामने आयी है।

 गैर जिम्मेदार पाकिस्तान है,

     भूख मरी वो छायी है ।


 शांति प्रिय हमारे भारत की, 

    बात अजब निराली है।

शौर्य शांति का सुमेल साध के

    जीती जंग जलाली है।।


स्वरचित:अशोक दोशी

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