हिन्दी हैं हम, हिन्दोस्ता हमारा!देश, सजा-धज़ा गुलिस्ता हमारा!
हर फूल का रंग, गंध जुदा-जुदा,
भाषा, परिवेश, परंपरा अलहदा!
एक धागे में गुंथे सुन्दर फूल अद्भुत!
बोलियों में गूंजे सुर जो हैं राष्ट्र-अग्रदूत !
हिन्दी दिल की धड़कन, हैं सुर-संगीत!
भाषा अभिव्यक्ति-संसार, ह्रदयस्थ गीत|
धर्म, जाती, उपासना पद्धति भले अलग,
मन्दिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा अलग!
राष्ट्र पुरुष को जोड़ती हिन्दी बहु सरल,
शहद सी मीठी, अमृत बना दें शब्द-गरल!
हिन्दी,जन-जन की भाषा, माध्यम सशक्त!
ह्रदय-स्पंदन-अभिव्यक्ति, यौवना मदमस्त!
माँ भारती की गरिमा, साहित्य का श्रुँगार,
तुलसी-कबीर-सूरदास-प्रिया, ज्ञानभण्डार!
उत्कट भावों की पटरानी, मधुशाला-सार!
प्रेमचंद की नायिका, अटलजी का हुंकार!
लोकतंत्र-दुंदुभी, शोषित-पीड़ित आवाज,
सूर्यरश्मियोंकी सौगात दीन-हीन आगाज़!
प्रजासत्ताक हिन्द की आन, बान, शान,
स्वतंत्रता की रणभेरी, शंखनाद, एलान!
मातृभूमि के भाल का कुंकुम, रक्तचन्दन,
हिन्द की सार्वभौमिकता को त्रिवार वंदन!
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा|